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Monday, 15 December 2014



ऑखे खुले तो
तुम सामने हो
बन्‍द हो तो
ख्‍वाबों में तुम हो
ख्‍वाहिशें दफन कर दिये सब 
सिवाय तुम्‍हारे
....... आनन्द विक्रम। । 

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