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Friday, 22 March 2013

इश्क में शिकवा शिकायतों के सिवा और भी कुछ है बताने के काबिल
हमने नहीं सुना न पढ़ा कभी मोहब्बत के गीत ख़ुशी में गाते हुए किसी को
जब भी देखा ,सुना ,पढ़ा दर्द और रुसवाइयों के गज़लें ही बज़्म में मिली
है क्या इस इश्क में आंसुओं और बेतहाशा दर्द में ख़ाक होने के सिवा ...
'आनंद'>

4 comments:

jyoti khare said...

आपकी रचनाएँ पढ़ी प्रेम का अहसास मन के भीतर समां सा गया है
सुंदर अनुभूति

आग्रह है मेरे ब्लॉग मैं भी समर्थक बने
मुझे खुशी होगी

धीरेन्द्र अस्थाना said...

kya baat hai.......!
Behtreen rchna.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

उम्दा,बहुत प्रभावी प्रस्तुति !!!

recent post : भूल जाते है लोग,

संजय कुमार भास्‍कर said...

ला-जवाब" जबर्दस्त!!