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Wednesday, 24 April 2013

मैं और शब्द  


तुम्हारे जाने के बाद
मेरे पास है क्या
सिवाय शब्दों के
उन्हीं से
शाम होते ही
बात किया करता हूँ
कभी तुम्हारा नाम लिखता हूँ
कभी तुम्हारे बारे में
रात यूं ही गुजर जाती है
और दिन कामों में
एक  मैं ही नहीं
और भी बहुत से साथी हैं
जो शब्दों में
अपनी अधूरी पूरी भावनाओं को
आकार देतें हैं
अब तो मेरे यही साथी हैं
तुम्हारे जाने के बाद
शाम होते ही
शब्दों के शब्द कोष
पास रख लेता हूँ
और  भांति भाँती शब्दों के आकार  में
तुम्हारे नाम की अल्पना
बनाया करता हूँ । 

4 comments:

jyoti khare said...


गहन अनुभूति
सुंदर रचना
उत्क्रष्ट प्रस्तुति


vibha rani Shrivastava said...

शब्दों के शब्द कोष
पास रख लेता हूँ
और भांति भाँती शब्दों के आकार में
तुम्हारे नाम की अल्पना
बनाया करता हूँ ।
बहुत खूब ! खुबसूरत अभिव्यक्ति
हार्दिक शुभकामनायें

रचना दीक्षित said...

भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करना भी दुरूह कार्य आपने आसानी से किया.

बधाई.

jyoti khare said...

प्रेम की अनुभूति शब्दों से ही उतरती है
वाकई शब्द ही हैं जो यादों को लिख रहें हैं
सुंदर रचना

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